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Saturday, February 1, 2020

SOME IMPOTANT ARTICLE OF INDIAN CONSTITUTION

February 01, 2020 0
SOME IMPOTANT ARTICLE OF INDIAN CONSTITUTION

 राज्‍य के नीति-निदेशक सिद्धात – Directive 

Principles of State Policy

राज्य के नीति निर्देशक सिंद्धांत का वर्णन संविधान के भाग-4 में (अनुच्छेद 36 से 51 तक) किया गया है. इसकी प्रेरणा आयरलैंड के संविधान से मिली है.
इसके माध्‍यम से संविधान राज्‍य को बताता है कि उसे सामाजिक तथा आर्थिक न्‍याय सुनिश्चित करने के लिये नैतिक दृष्टि से किन पक्षों पर बल देना चाहिये।
संविधान के अनुच्छेद-37 में कहा गया है कि विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्त्तव्य होगा| संविधान के अनुच्छेद 355 और 365 का प्रयोग इन नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए किया जा सकता है|

राज्‍य के नीति-निदेशक सिद्धात से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद

अनुच्‍छेद-36: परिभाषा – नीति-निदेशक तत्‍वों के संदर्भ में ‘राज्‍य‘ की परिभाषा है। इसमें भी राज्‍य का वही अर्थ है जो भाग 3 में है।
अनुच्‍छेद-37: इस भाग में दिये गए तत्‍वों का न्‍यायालय द्वारा प्रवर्तनीय न होते हुए भी देश के शासन में मूलभूत माना गया है तथा विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्‍य का कर्तव्‍य होगा।
अनुच्‍छेद-38: राज्‍य लोक-कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिये सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा।
अनुच्छेद-38(1): राज्‍य लोक-कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिये सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा ताकि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्‍याय हो सके।
अनुच्‍छेद-38(2): आय, प्रतिष्‍ठा, सुविधाओं तथा अवसरों की असमानताओं को समाप्‍त करने का प्रयास करना।
अनुच्छेद 39 (क) सामान न्याय और नि:शुल्क विधिक सहायता, समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था इसी में है.
अनुच्छेद 39 (ख) सार्वजनिक धन का स्वामित्व तथा नियंत्रण इस प्रकार करना ताकि सार्वजनिक हित का सर्वोत्तम साधन हो सके.
अनुच्छेद39 (ग) धन का समान वितरण.
अनुच्छेद 40– राज्य ग्राम पंचायतों को स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में संगठित करेगा।
अनुच्छेद 41 कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार.
अनुच्‍छेद-42: काम की न्‍याय संगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।
अनुच्छेद-43: कर्मकारों के लिये निर्बाह मजदूरी , शिष्ट जीवन स्तर व अवकाश की व्यवस्था करना , और कुटीर उद्धोगों को प्रोत्साहित करना

अनुच्‍छेद-43क: उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों के भाग लेने के लिये उपयुक्‍त विधान बनाना।
अनुच्छेद 44 नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता.
अनुच्छेद 45 सभी बालकों को 14 वर्ष तक की आयु पूरी करने तक निःशुल्क ओर अनिवार्य शिक्षा देना ।
अनुच्छेद 46 अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों की शिक्षा और अर्थ-संबंधी हितों की अभिवृद्धि.
अनुच्छेद 47 पोषाहार स्तर, जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वाथ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य.
अनुच्‍छेद-48: कृषि और पशुपालन का संगठन कृषि तथा पशुपालन का संगठन आधुनिक-वैज्ञानिक प्रणालियों के अनुसार करना तथा गाय-बछडों व अन्‍य दुधारू या वाहक पशुओं की नस्‍लों का परिरक्षण और सुधार करना व उनके वध का प्रतिषेध करने के लिये कदम उठाना।
अनुच्‍छेद-48क: पर्यावरण के संरक्षण व संवर्द्धन तथा वन व वन्‍य जीवों की रक्षा का प्रयास करना।
अनुच्‍छेद-49: राष्‍ट्रीय महत्‍व के स्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण करना।
अनुच्‍छेद-50: कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्करण
अनुच्छेद 51 अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि
Note – 42 वें संविधान संशोधन 1976 में माध्‍यम से नीति-निदेशक तत्‍वों में अनुच्‍छेद 39क, 43क, तथा 48क को अन्‍त:स्‍थपित किया गया ।

मौलिक अधिकार एवं नीति निर्देशक सिंद्धांत में अंतर क्या है

नीति निर्देशक सिंद्धांत
1. यह आयरलैंड के संविधान से लिया गया है.
2. इसका वर्णन संविधान के भाग-4 में है.
3. इसे लागू कराने के लिए न्यायालय नहीं जाया जा सकता है.
4. यह समज की भलाई के लिए है.
5. इसके पीछे राजनीतिक मान्यता है.
6. यह सरकार के अधिकारों को बढ़ाता है.
7. यह राज्य सरकार के द्वारा लागू करने के बाद ही नागरिकों को प्राप्त होता है.
मौलिक अधिकार
1. यह संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है.
2. इसका वर्णन संविधान के भाग-3 में किया गया है.
3. इसे लागू कराने के लिए न्यायालय की शरण ले सकते हैं.
4. यह व्यक्ति के अधिकार के लिए है.
5. मौलिक अधिकार के पीछे क़ानूनी मान्यता है.
6. यह सरकार के महत्व को घटाता है.
7. यह अधिकार नागरिकों को स्वतः प्राप्त हो जाता है.

 BY - A.K. BHARTI 
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